SHAYARAbhishreshtha Tiwari· · ·जिस रोज़ से पड़ी तेरे सिन्दूर पे नज़र उस दिन से आज तक मेरा चेहरा उदास है
SHAYARShahbaz Talib· · ·सारे अल्फ़ाज़ ये तुम्हारे थे , बिन तेरे ज़िन्दगी नहीं होती दूर होके भी मुझसे ज़िन्दा हो , तुमको शर्मिंदगी नहीं होती
SHAYARCharagh Sharma· · ·तुम्हारा क्या है तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है
SHAYARDr. Bhawana Srivastava· · ·गुनाह-ए-इश्क़ में इस बात की तस्कीन होती है हुआ हो जुर्म गहरा तो सज़ा संगीन होती है
SHAYARRanjeet Singh Chauhan· · ·दरिया तलाशना कहीं सहरा तलाशना मुश्किल है ख़ुद के जिसे ही दुनिया तलाशना
SHAYARSujit Sahgal Haasil· · ·इश्क़ मेरा ग़ुरूर था उन का , मुझ पे हर पल सुरूर था उन का बस निगाहों से क़त्ल कर बैठे , और तो क्या क़ुसूर था उन का
SHAYARIbrahim Ali Zeeshan· · ·आज आऊँगा तिरे पास मोहब्बत ले कर मुद्दतें हो गईं 'इज़्ज़त का जनाज़ा निकले
SHAYARNavin Joshi Nava· · ·ज़माने भर की लाशों पर भी हो जाए खड़ी नफ़रत पर उस का क़द मोहब्बत के बराबर हो नहीं सकता